Thursday, 17 November 2016

पुनर्जन्म क्या हैं what is rebirth concept ?



वैदिक धर्म पुनर्जन्म, कर्मवाद और मोक्ष की कामना का चिंतन देता हैं, पूर्व जन्म के कर्मों का फल इस जन्म में तथा इस जन्म के कर्मों का फल अगले जन्म का हेतु बनता है। इसके प्रमाण संसार में व्याप्त वैविध्य, अनेकत्व, दुःख, सुख, धनवत्ता, निर्धनता, रोग, शोक आदि हैं। 

इसका चिंतन भाग्यवाद पर कर्मवाद की विजय का अमर संदेश देता हैं। मनुष्य कर्म, पुरुषार्थ, लगन और संकल्प से देवत्व को प्राप्त कर सकता हैं।

मोक्ष की कामना वैदिक-चिंतन ने मानव जीवन का परम ध्येय बताया है। मोक्ष का अर्थ है – जन्म, मृत्यु, जरा, व्याधि आदि के बंधन से छूट कर सच्चिदान्नद के आनन्द मे विचरण करना। मोक्ष प्राप्ति के उपाय तथा आधार वैदिक चिंतन कूी उल्लेखनीय विशेषता रहे हैं। इसमें जीवन को उत्तरोत्तर श्रेष्ठ, पवित्र और निष्काम कर्म मे प्रवृत होने के सोपान बताए गए हैं।

इस विचारधारा को पढ़ने और समझने की जरूरत है। कई विचारधारा वाले पुनर्जन्म नहीं मानते है। पुनर्जन्म की भावना मनुष्य को सुधारने और संमलने का आवसर देती है। 

यह दृष्टिकोण जीवन से निराश एवं हताश होने से बचाता है। इस जन्म मे ही अगले जन्म का आधार बनाना होता हैं। पुनर्जन्म के विश्वास एवं आस्था से जीवन पवित्र एवं श्रेष्ठ बनता है।

Wednesday, 16 November 2016

यज्ञ या हवन किसे कहते हैं?


वैदिक धर्म यज्ञ, कर्मकांड एवं संस्कारो का शास्त्रीय वैदिक स्वरूप संसार को बताता है। यज्ञ सृष्टि का मूलाधार हैं।
यज्ञ इस देश की संस्कृति की पहचान हैं । यह संसार का श्रेष्ठतम कर्म हैं जिनसे दूसरों का उपकार होता हैं, दूसरों को सुख शांति तथा प्रसन्नता मिलती हैं, वे सभी कर्म यज्ञ कहलाते हैं।
यज्ञ में हिंसा वर्जित है। संस्कार तथा कर्मकांड जीवन निर्माण के आधार तत्व हैं। इनका सत्य रूप आर्य समाज दर्शाता है। यज्ञ जीवन है, यज्ञ, दान, पूजा तथा संगतिकरण का भाव जागृत करता हैं।

यज्ञ रोग और शोक का नाशक है। जो कर्मकांड एवं संस्कारों में पाखण्ड़, विकृतियां एवं ठगविध्या आ गई है, उसका यह संगठन आर्य समाज विरोध करता हैं। तथा यज्ञ का सत्यस्वरूप एवं व्यावहारिक रूप संसार के बताता है।

यज्ञ की महिमा अन्नत है। जीवन और जगत को यज्ञ के साथ जोड़ो। तभी सृष्टि रोग व शोक से मुक्त हो सकता सकेंगी।

Saturday, 12 November 2016

क्या हिन्दू धर्म में बहुविवाह है What is Hinduism polygamy ?


प्राचीन भारत मे बहुविवाह निषिद्ध नहीं था, लेकिन इस तरह का विवाह आम नहीं था और न ही कोई प्रमुख सांस्कृतिक परंपरा  थी। 

Thursday, 10 November 2016

वेद ज्ञान किसे कहते हैं what is vedas ?



आर्य समाज की मान्यताओं का मूलाधार वेद हैं। वेद ईश्वरीय ज्ञान हैं सृष्टि के आरम्भ में परमात्मा ने प्राणियों के कल्याण के लिए वेदों का ज्ञान प्रदान किया। इसलिए वेद सबके हैं और सबको इनके पढ़ने का अधिकार हैं।

वेदों में अनित्य इतिहास, भूगोल, देश, प्रांत, जाति, वर्ग आदि का वर्णन नहीं हैं। वेद परमात्मा का आदेश, उपदेश और सन्देश है। वेद सब सत्य विद्याओं का आधार हैं। वेद ज्ञान में मानवता का चिंतन है। वेदों की शिक्षाएं और उपदेश संसार को सत्यपथ दिखा देते है। वेद ज्ञान इस देश की महत्वपूर्ण पहचान हैं।

इनकी रक्षा करना, परम्परा को जीवित रखना और पढ़ना पढाना हम सबका पुनीत कर्तव्य हैं। आज जीवन और जगत में सरल, सीधा व सुंदर समाधान प्राण हैं। वेद प्रचार आर्य समाज का मुख्य  उद्देश्य रहा हैं। वेदानुकूल आचरण से ही जीवन में सच्ची, सुख—शांति व आनंद प्राप्त हो सकता है।

स्वामी दयानंद का संसार पर महत्वपूर्ण उपकार हैं, जो उन्होंने वेदों का यथार्थ स्वरूप बताया और दिखाया है। वेद मार्ग ही सत्य एवं श्रेष्ठ हैं। इसी का अनुकरण करना हमारा कर्तव्य है।

Wednesday, 9 November 2016

आस्तिकता का सही अर्थ क्या हैं




आर्य समाज सर्वत्र व्याप्त निराकार एवं सर्वहितकारी ईश्वर में आस्था रखता है और उसी की उपासना का शास्त्र सम्मत मार्ग बताता है । वह मूर्तिपूजा में विश्वास नहीं करता है। उसकी दृष्टि में परमात्मा अवतार नहीं लेता है । वह जन्म मरण के बन्धन से मुक्त है । वह कण कण में सर्वत्र विद्यमान है । ज्ञान की आँखों से उसकी अनुभूति होती हैं । जीवात्मा से उसका सीधा संबंध है इस विचारधारा का एकेश्वरवाद महत्वपूर्ण विशेषता है ।

ईश्वर की अनुभूति करने के. यम, नियम, साधना, योगाभ्यास आदि आधार वैज्ञानिक, व्यावहारिक एवं जीवनोपयोगी है । परमेश्वर विषयक ऐसा सीधा व सार्थक दृष्टिकोण अन्यत्र दुर्लभ है ।

एक परमात्मा को मानने से अनेक विवाद, समस्याएँ तथा सम्प्रदायों के झगड़े स्वतः समाप्त हो जाते है। यह चित्र विचित्र सृष्टि बनाने वाले प्रभु का संकेत कर रही है । वह जगदीश्वर अपने कर्मों द्वारा सर्वत्र प्रगट हो रहा हैं । वह तो अनुभव का विषय है । जब ह्रदय निर्मल और सात्विक अवस्था में होता है तब उसकी ह्रदय मन्दिर में अनुभूति होती हैं।

आज ये सारा संसार परमेश्वर को बाहर की दुनिया में खोज रहा है । यही भूल हो रही है वैदिक धर्म प्रभु का सच्चा व सीधा रास्ता बताता है।

Monday, 7 November 2016

वैदिक धर्म या आर्य समाज क्या हैं ? what is Vedic religion(dharm) or arya samaj ?


यह एक ऐसी संस्था है जो भारत देश की आजादी से सालों पहले सन् १८७५ ई० में महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा मुम्बई मे स्थापित हुईं थीं ।  यह पंथ, सम्प्रदाय व मज़हब नहीं हैं । श्रेष्ठ, सदाचारी, ईश्वर विश्वासी जनों के संगठन का नाम आर्य समाज है, यह आस्तिक समाज है । यह वैचारिक चिंतनधारा है । इस चिंतन का आधार तर्क, प्रमाण, युक्ति, सृष्टिकर्म, व्यवहार और विज्ञान आदि हैं। सुन्दर, सफल एवं श्रेष्ठ जीवन जीने के लिए आर्य समाज विचार एवं दृष्टि देता है।
इसकी विचारधारा में आध्यनत प्राणी मात्र के कल्याण की आैर मानवता का स्वर मिलाता है। इसका वैचारिक चिंतन मानव मात्र को सीधा, सच्चा व सरल मार्ग बताता है । यह हिन्दुत्व के चिंतन का परिष्कृत रूप है । वैदिक धर्म ईश्वरीय है। इसकी मान्यताएं और सिद्धांत वैज्ञानिक, व्यावहारिक, उपयोगी तथा पूर्ण हैं।
आर्य समाज सत्य सनातन वैदिक धर्म को मानव व समाज की उन्नति का मूल साधन मानता है । अन्य मत, पंथ, मज़हब आदि किसी पीर, पैगम्बर, गुरु द्वारा चलाए हुए हैं, किन्तु वैदिक धर्म ईश्वरीय है और संसार मे सबसे प्राचीन हैं । इससे बढ़कर और कोई धर्म नहीं हैं। यह बहुजन हिताय और बहुजन सुखाय की दृष्टि देता है । यह समाज किसी प्रकार का भेदभाव, ऊचं नीच तथा जाति पाति मे विश्वास नहीं रखता हैं । यह सर्वजन सुलभ ग्राह्य विचारधारा का प्रचारक है।