वैदिक धर्म पुनर्जन्म, कर्मवाद और मोक्ष की कामना का चिंतन देता हैं, पूर्व जन्म के कर्मों का फल इस जन्म में तथा इस जन्म के कर्मों का फल अगले जन्म का हेतु बनता है। इसके प्रमाण संसार में व्याप्त वैविध्य, अनेकत्व, दुःख, सुख, धनवत्ता, निर्धनता, रोग, शोक आदि हैं।
इसका चिंतन भाग्यवाद पर कर्मवाद की विजय का अमर संदेश देता हैं। मनुष्य कर्म, पुरुषार्थ, लगन और संकल्प से देवत्व को प्राप्त कर सकता हैं।
मोक्ष की कामना वैदिक-चिंतन ने मानव जीवन का परम ध्येय बताया है। मोक्ष का अर्थ है – जन्म, मृत्यु, जरा, व्याधि आदि के बंधन से छूट कर सच्चिदान्नद के आनन्द मे विचरण करना। मोक्ष प्राप्ति के उपाय तथा आधार वैदिक चिंतन कूी उल्लेखनीय विशेषता रहे हैं। इसमें जीवन को उत्तरोत्तर श्रेष्ठ, पवित्र और निष्काम कर्म मे प्रवृत होने के सोपान बताए गए हैं।
इस विचारधारा को पढ़ने और समझने की जरूरत है। कई विचारधारा वाले पुनर्जन्म नहीं मानते है। पुनर्जन्म की भावना मनुष्य को सुधारने और संमलने का आवसर देती है।
यह दृष्टिकोण जीवन से निराश एवं हताश होने से बचाता है। इस जन्म मे ही अगले जन्म का आधार बनाना होता हैं। पुनर्जन्म के विश्वास एवं आस्था से जीवन पवित्र एवं श्रेष्ठ बनता है।

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