वैदिक धर्म यज्ञ, कर्मकांड एवं संस्कारो का शास्त्रीय वैदिक स्वरूप संसार को बताता है। यज्ञ सृष्टि का मूलाधार हैं।
यज्ञ इस देश की संस्कृति की पहचान हैं । यह संसार का श्रेष्ठतम कर्म हैं जिनसे दूसरों का उपकार होता हैं, दूसरों को सुख शांति तथा प्रसन्नता मिलती हैं, वे सभी कर्म यज्ञ कहलाते हैं।
यज्ञ में हिंसा वर्जित है। संस्कार तथा कर्मकांड जीवन निर्माण के आधार तत्व हैं। इनका सत्य रूप आर्य समाज दर्शाता है। यज्ञ जीवन है, यज्ञ, दान, पूजा तथा संगतिकरण का भाव जागृत करता हैं।
यज्ञ रोग और शोक का नाशक है। जो कर्मकांड एवं संस्कारों में पाखण्ड़, विकृतियां एवं ठगविध्या आ गई है, उसका यह संगठन आर्य समाज विरोध करता हैं। तथा यज्ञ का सत्यस्वरूप एवं व्यावहारिक रूप संसार के बताता है।
यज्ञ की महिमा अन्नत है। जीवन और जगत को यज्ञ के साथ जोड़ो। तभी सृष्टि रोग व शोक से मुक्त हो सकता सकेंगी।

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